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روي بنماي و وجود خودم از يـاد ببر
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خرمـــن سوختگان را همه گو باد ببر |
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ما چو داديم سر و ديده به طوفــان باد |
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گــــو بيا سيـل غم و خانه ز بنياد
ببر |
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زلف عنبرخامش، كه ببويد هيــــهات اي |
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اي گـــل خام اين سخن از يـــاد ببر |
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سينه گو، شعله آتشكدة فارس بكــش |
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ديــــده گو آب رخ، دجله بغـداد ببر |
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دولت پير مغان بادكه باقي سهل است |
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ديـگري گو برد، نامه من از يـــاد ببر |
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روز مرگم نفسي وعده ديـــدار بده |
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و انـگهم تـا بـه لحد فـارغ و آن را ببر |
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حافظ انديشه كن از نازكي خاطر يار |
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پــرواز در گهش اين ناله و فريـاد ببر |
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